देखिए जिसके साथ आपके मामलात हैं , जो आपका साथी होता है ,सहपाठी होता है , हमसफर होता है या दोस्त होता है ।उसके साथ बहुत सारी बातें होती हैं, काम होते है, विचार विमर्श होते हैं और इधर-उधर की दूसरों की बातें भी होती हैं । अगर वह व्यक्ति दूसरों के प्रति जिनको वह अपना मित्र , ससहपाठी या हमसफर जो भी मांग मानता हो ,उनके प्रति भरोसेमंद है । उस व्यक्ति से आप जो अपेक्षा करते हो कि वह आपकी बात कही नहीं कहेगा। आपकी दूसरे लोगों के बीच में प्रशंसा करें या आप के मान सम्मान की बात करें। इसको आप बहुत ही सरल तरीके से पहचान सकते हैं ।आप यह देखें कि दूसरे लोगों की वह प्रशंसा कर रहा है या उनकी निंदा कर रहा है। यदि वह दूसरों की निंदा अधिक करता हो तो समझ लीजिए कि आपकी भी निंदा दूसरों के सामने करता होगा। दूसरों की कमियां गिनाता होगा तो अवश्य ही आप की भी कमियां दूसरों के सामने गिनाता होगा। इससे आप यह तय कर सकते हैं कि उस पर भरोसा किया जाए अथवा नहीं ।यह ऐसा फार्मूला है कि हम कभी भी कहीं पर किसी पर भी अप्लाई कर सकते हैं।
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